*ग्राम मोहीपुरा में भीलटदेव की प्राण प्रतिष्ठा में चक्षु मिलन के दौरान टूटा शीशा।*
*शीशा टूटने की घटना को श्रद्धालु मान रहे भगवान का आशीर्वाद, बना जनचर्चा का विषय।*
अंजड:- नगर के समीपस्थ नर्मदा तट किनारे स्थित ग्राम मोहीपुरा नई बसाहट में स्थित भीलट देव मन्दिर का जीर्णोद्धार कर उसमें भगवान भीलटदेव एवं पद्मानगिन के जोड़े तथा भगवान भोलेनाथ एवं शिव परिवार की प्राण प्रतिष्ठा का तीन दिवसीय धार्मिक आयोजन दिनांक 07 से 09 अगस्त तक बागदी आश्रम से पधारी संत अखिलेश्वरी देवी के सानिध्य में सम्पन्न किया गया।
9 अगस्त शुक्रवार नागपंचमी पर भीलटदेव मन्दिर में मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा के बाद स्थापित भगवान भीलट देव व पद्मानगिन को जब शीशा दिखाया गया तो तेज आवाज के साथ शीशे के टुकड़े-टुकड़े हो गए जिससे श्रद्धालुओ में उत्सुकता का वातावरण बन गया जिसे भगवान भीलटदेव का चमत्कार व आशीर्वाद मान रहे है जो क्षेत्र में जनचर्चा का विषय बना हुआ है।
वैदिक मंत्रों में अपार शक्ति:-
प्राण प्रतिष्ठा में उपस्थित संत अखिलेश्वरी देवी ने दर्पण टूटने के बारे में बताते हुए कहा कि हमारे वेद पुराण, उपनिषद व साहित्यों में लिखे वैदिक मंत्रों में बहुत बड़ी शक्ति होती है जो पत्थर में भी प्राण फूंकने का काम करते है।
जब मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा पूरे विधि विधान व सही तरीके से होती है तब दर्पण टूटने की घटना होती है और भगवान भक्तों के बीच अपनी उपस्थिति का आभास करवाते है।
आगे उन्होंने बताया कि हमारे वैदिक सनातन धर्म में जब देवी देवताओं की मूर्तियो की प्राण प्रतिष्ठा की पूरी विधि होती है और इस दौरान मूर्तियों की आखों पर पट्टी बांधी जाकर उनकी तीन से चार दिनों तक पंडितों द्वारा वैदिकमंत्रोच्चार के साथ विधि विधान से पूजन-अर्चन किया जाता जिससे उन मूर्तियों में प्राण स्वरूप एक विशिष्ट ऊर्जा स्थापित हो जाती है। प्राण प्रतिष्ठा के अंतिम चरणों मे मेसे एक विशेष चरण होता है जिसे 'चक्षु उन्मीलन' कहा जाता है। इसी प्रक्रिया में स्थापित देवी देवताओं के नेत्र खुल जाते है और उनमें समाहित अपार ऊर्जा नेत्रों के माध्यम निकलती है। उसी समय मूर्तियो को दर्पण दिखाया जाता है जिससे दर्पण टूट जाता है और भगवान भक्तों के बीच अपनी उपस्थिति का अहसास करवाते है। यह चमत्कार सिर्फ हमारे वैदिक सनातन धर्म मे ही देखने या सुनने को मिलता है।
नागपंचमी पर यह हुआ आयोजन:-
शुक्रवार नागपंचमी पर बागदी आश्रम से पधारी संत दीदी अखिलेश्वरी देवी के सानिध्य में भीलटदेव मन्दिर में मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन सम्पन्न हुआ।
प्राण प्रतिष्ठा के तीसरे दिन शुक्रवार को सुबह 6 बजे से पंडितों द्वारा वैदिकमंत्रोच्चार के साथ स्थापित देवी देवताओं का पूजन अर्चन शुरू किया तथा नवनिर्मित मन्दिर में भगवान भीलटदेव व पद्मानगिन के अलावा भगवान शिव व शिव परिवार की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की गई पश्चात दो दिनों से चल रहे यज्ञ की पूर्णाहुति की गई तथा महाआरती कर प्रसादी का वितरण किया गया। उसके बाद मन्दिर के पट दर्शनार्थियों के लिए खोल दिये तथा भक्तों का तांता दिनभर लगा रहा।
फोटो:- संत अखिलेश्वरीदेवी स्थापित भीलटदेव व पद्मानगिन की मूर्ति के सामने टूटा हुआ शीशा दिखाते हुए।
पूजन अर्चन व हवन करते श्रद्धालुजन।