विडीओ कांफ्रेंस के माध्यम से दी जानकारी
किशोर न्याय पद्धति के अनुसार बाल अपचारी के पुराने अभिलेख समाप्त कर दिए जाने चाहिए - मँसूरी
अंजड - संचालनालय लोक अभियोजन मध्यप्रदेश के द्वारा माननीय उच्चन्यायालय ग्वालियर के द्वारा राजीव शर्मा विरुद्ध मध्यप्रदेश राज्य में पारित निर्णय में किशोर न्यायालय अधिनियम 2015 से सम्बंधित प्रकरणो में किशोर न्यायालय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण ) अधिनियम की धारा तीन उपधारा 11,12 एवं 14 एवं सुसंगत प्रावधान के बारे में समस्त अभियोजन अधिकारियों को अवगत करवाए जाने हेतु निर्देश दिए गए हे ।
इसी तारतम्य में बड़वानी ज़िले में पदस्थ सभी अभियोजन अधिकारियों को गूगल मीट के माध्यम से अभियोजन अधिकारी अंजड के द्वारा सम्बोधित किया गया जिसमें किशोर न्याय अधिनियम 2015 जानकारी दी गई ।
श्री मँसूरी के द्वारा अपने सम्बोधन में जानकारी दी गई की उक्त अधिनियम की धारा तीन में दिए गए सोलह मूलभूत सिद्धांत से केंद्रीय व राज्य सरकार ,किशोर न्याय बोर्ड व समिति मार्गदर्शित होगे तथा विधि का उल्लंधन करने वाले बालक का अभिलेख प्रकरण समाप्त होने के बाद समाप्त कर दिया जाएगा ।
श्री मँसूरी के द्वारा यह भी बताया गया की यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान में अट्ठारह साल से कम आयु के बालक को मादक लीकर,स्वापक ओषधि,मन:प्रभावी प्रदार्थ या तम्बाकू उत्पाद देगा या दिलवाएगा उसे अधिनियम में सात साल तक के कठोर कारावास और एक लाख रुपये तक का जुर्माना का प्रावधान किया गया हे ।