Rajendra Devray / Sat, Jun 27, 2026 / Post views : 443
ग्राम गुलाटी में हाई मास्क योजना पर उठे सवाल, लागत और बिजली बिल को लेकर ग्रामीणों ने मांगी जांच
मनावर। ग्राम पंचायत गुलाटी में 15वें वित्त आयोग की राशि से स्थापित की जा रही हाई मास्क लाइट योजना को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आपत्तियां दर्ज कराते हुए इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के छह प्रमुख चौराहों पर लगाए गए छह हाई मास्क पोल की कुल लागत लगभग 10 लाख 22 हजार रुपये दर्शाई गई है, जो वास्तविक लागत की तुलना में अत्यधिक प्रतीत होती है।

ग्रामीणों के अनुसार प्रत्येक पोल की ऊंचाई लगभग 25 फीट है तथा प्रत्येक पोल पर 200 वाट क्षमता के छह एलईडी बल्ब लगाए गए हैं। इस प्रकार छह पोलों पर कुल 36 लाइटें स्थापित की गई हैं, जिनकी कुल विद्युत खपत लगभग 7200 वाट बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जब ग्राम पंचायत का जल प्रदाय (वाटर वर्क्स) संबंधी बिजली बिल पिछले पांच वर्षों से लगभग 4 लाख 50 हजार रुपये बकाया है और पंचायत उसका भुगतान करने में सक्षम नहीं है, तो हाई मास्क लाइटों का भविष्य का बिजली खर्च कैसे वहन किया जाएगा, यह बड़ा प्रश्न है।
ग्रामीणों ने बताया कि करीब दो माह पूर्व एक निजी कंपनी द्वारा पोल स्थापित कर दिए गए थे, लेकिन विद्युत विभाग द्वारा पूर्व बकाया राशि का हवाला देते हुए नए कनेक्शन या विद्युत आपूर्ति देने से इंकार किए जाने की बात सामने आ रही है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि योजना केवल कागजों तक सीमित रह सकती है और नियमित रूप से संचालित नहीं हो पाएगी।
ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार केवल औपचारिक रूप से लाइट चालू कर योजना पूर्ण होने का दावा कर सकता है, जबकि लंबे समय तक इसका लाभ ग्रामवासियों को नहीं मिलेगा। उन्होंने मांग की है कि योजना की स्वीकृति प्रक्रिया, लागत, तकनीकी मानकों तथा भुगतान संबंधी दस्तावेजों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शासन की राशि का उपयोग नियमानुसार हुआ है या नहीं।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों से मांग की है कि योजना की वास्तविक उपयोगिता, लागत और भविष्य में संचालन की व्यवस्था का परीक्षण कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में ग्रामीणों तक पहुंचे।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि योजना की निष्पक्ष जांच होती है तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी और सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंकाओं पर भी विराम लगेगा।
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