Rajendra Devray / Mon, May 19, 2025 / Post views : 244

भव्य चल समारोह के साथ बही भक्ति की निर्मल धारा
एअंतिम दिन पूर्णाहुति के साथ हुआ समापन
रिपोर्टर कांतिलाल शर्मा नालछा
नालछा/ ग्राम सगड़ी में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का सात दिवसीय अमृत महोत्सव भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। समापन दिवस पर कथा स्थल से एक भव्य चल समारोह निकाला गया, जिसमें श्रद्धालुजन भक्ति भाव में सराबोर होकर झूमते-गाते भगवान के जयकारे लगाते हुए नगर भ्रमण को निकले। जगह-जगह ग्रामीणों द्वारा श्रीमद् भागवत कथा की पूजा अर्चना कर चल समारोह का स्वागत किया।
नाचते गाते हुए शामिल हुए चल समारोह में
चल समारोह में सजे-धजे रथ पर भगवान श्रीकृष्ण, राधा, श्रीराम व अन्य दिव्य स्वरूपों की झांकी आकर्षण का केंद्र रही। बैंड-बाजे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के साथ वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु महिलाओं ने कलश यात्रा के रूप में शोभा बढ़ाई, वहीं बाल-भक्त नाचते गाते हुए चल रहे थे।
भागवत केवल ग्रंथ नहीं, जीवन का सार है
कथा व्यास पंडित श्री शुभम दुबे महाराज ने सप्तम दिवस पर सुदामा चरित्र, श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह और भगवान के धामगमन की लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए जीवन में सत्संग, सेवा, श्रद्धा और सच्ची भक्ति की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भागवत केवल ग्रंथ नहीं, जीवन का सार है; इसकी कथा आत्मा को शुद्ध करती है और परमात्मा से मिलन का मार्ग प्रशस्त करती है।
हवन में शामिल हुए श्रद्धालु
कथा स्थल पर हवन कुंड में पांच जोड़ शामिल हुए जिनके द्वारा आहुतियां डालकर क्षेत्र में सुख समृद्धि की कामना करते हुए पूर्णाहुति की गई इसके पश्चात महा आरती कर महाप्रसादी का वितरण किया गया।
कथावाचक को किया सम्मानित समापन अवसर पर ग्रामवासियों व समिति के सदस्यों द्वारा भागवत कथा वाचन देवास से पधारे पंडित शुभम दुबे को सम्मानित किया गया। साथ ही आयोजन में सहयोग देने वाले सभी भक्तों, सेवादारों एवं व्यवस्थापकों का आभार व्यक्त किया गया। यह आयोजन ग्राम्य जीवन में धर्म, संस्कृति और समाज की एकता को सुदृढ़ करने वाला एक प्रेरणास्पद आयोजन के रूप में पहचान बन गई। श्रीमद् भागवत कथा के इस आयोजन ने गांव में भक्ति, सद्भाव और सांस्कृतिक चेतना का संचार करते हुए जनमानस को दिव्यता से ओतप्रोत कर दिया।
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