Rajendra Devray / Tue, Sep 15, 2026 / Post views : 214
नई दिल्ली 15 सितंबर 2026 को UPI के MDR को लेकर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया है।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने ₹2,000 से अधिक के UPI व्यापारी भुगतान पर शुल्क/MDR लगाने का रास्ता खोल दिया है। उन्होंने इसे अमेरिकी दबाव से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और कहा कि इसका बोझ अंततः आम उपभोक्ता पर पड़ सकता है।
उनका मूल राजनीतिक तर्क यह है कि UPI भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था की बड़ी सफलता है और उस पर शुल्क लगाने से छोटे दुकानदारों तथा आम लोगों पर असर पड़ेगा।
लेकिन वास्तविकता क्या है?
यहाँ राहुल गांधी के बयान में एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है।
1. ₹2,000 तक के UPI भुगतान पर शुल्क नहीं लगाया गया है।
सरकार की मौजूदा व्यवस्था में ₹2,000 तक के UPI लेनदेन पर MDR नहीं लगाने की बात स्पष्ट है।
2. ₹2,000 से अधिक के व्यापारी भुगतान पर अब MDR का प्रावधान वास्तव में सामने आया है।
आज की रिपोर्ट के अनुसार NPCI ने ₹2,000 से अधिक के Person-to-Merchant (P2M) UPI भुगतान पर 0.4% MDR लागू करने की घोषणा की है, जो 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी।
3. हर UPI भुगतान पर 0.4% शुल्क नहीं लगेगा।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह व्यवस्था व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) भुगतान पर लागू नहीं है। यानी आप किसी व्यक्ति को ₹5,000 या ₹20,000 UPI से भेजते हैं तो इस MDR की बात उस लेनदेन पर लागू नहीं होती। प्रस्तावित/घोषित MDR मुख्यतः व्यक्ति से व्यापारी (P2M) भुगतान के लिए है।
उदाहरण से समझिए
मान लीजिए आप किसी दुकान पर ₹10,000 का सामान खरीदकर UPI से भुगतान करते हैं।
0.4% MDR = ₹40
लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि UPI ऐप आपके खाते से सीधे ₹40 काट लेगा। MDR मूलतः भुगतान स्वीकार करने वाली व्यापारी व्यवस्था से संबंधित शुल्क है। वास्तविक रूप से यह शुल्क बैंक, पेमेंट ऐप, पेमेंट एग्रीगेटर और व्यापारी के बीच किस प्रकार बांटा जाएगा और ग्राहक से इसे सीधे वसूलने की अनुमति होगी या नहीं—यह अलग नियामकीय/व्यावसायिक प्रश्न है।
तो राहुल गांधी का दावा कितना सही?
तथ्यात्मक हिस्सा:
₹2,000 से अधिक के व्यापारी UPI भुगतान पर MDR लगाने का रास्ता खुला है—यह बात वास्तविक है, और आज की रिपोर्टिंग के अनुसार 0.4% MDR की घोषणा भी हो चुकी है।
लेकिन राजनीतिक दावा:
इसे सीधे "अमेरिका के दबाव में मोदी सरकार ने किया" कहना एक राजनीतिक आरोप है। उपलब्ध तथ्य अपने-आप में यह साबित नहीं करते कि MDR लगाने का निर्णय अमेरिकी दबाव के कारण लिया गया। विपक्ष ऐसा आरोप लगा रहा है, जबकि सरकार/भाजपा ने इसे भ्रामक बताया है।

सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष
मुद्दा
वास्तविक स्थिति
₹2,000 तक UPI
MDR नहीं
₹2,000 से अधिक व्यापारी भुगतान
0.4% MDR की घोषणा
व्यक्ति से व्यक्ति UPI
मुफ्त रहने की बात
हर UPI भुगतान पर शुल्क
गलत
0.4% ग्राहक के खाते से सीधे कटेगा
ऐसा निष्कर्ष अभी नहीं निकालना चाहिए
अमेरिका के दबाव के कारण निर्णय
राहुल गांधी का राजनीतिक आरोप, प्रमाणित तथ्य नहीं
प्रभावी तारीख
15 अक्टूबर 2026
इसलिए यदि इसे निष्पक्ष पत्रकारिता की भाषा में लिखना हो तो सबसे सटीक लाइन होगी:
“राहुल गांधी ने ₹2,000 से अधिक के UPI व्यापारी भुगतान पर MDR की व्यवस्था को लेकर सरकार पर हमला बोला; वास्तविकता यह है कि 15 अक्टूबर से ऐसे P2M लेनदेन पर 0.4% MDR लागू करने की घोषणा हुई है, जबकि ₹2,000 तक के भुगतान और व्यक्ति-से-व्यक्ति UPI लेनदेन को शुल्क से बाहर रखा गया है।”
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