Rajendra Devray / Wed, May 27, 2026 / Post views : 265
पद्मिनी एकादशी पर अंजड के श्याम मन्दिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, हजारों भक्तों ने नवाया शीश
खाटूधाम से लाई गई अखण्ड ज्योत के हुए दर्शन, इंदौर के फूलों से हुआ मनमोहक श्रंगार
अंजड: अधिकमास की पद्मिनी एकादशी के पावन अवसर पर नगर के श्री श्याम मन्दिर में मंगलवार को श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। भीषण गर्मी के बावजूद अलसुबह से ही मंदिर में हजारों भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। भक्तों ने बाबा श्याम के दरबार में शीश नवाकर पुण्य लाभ अर्जित किया।
निशान और अर्जी का लगा तांता
सुबह से ही भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। बड़ी संख्या में श्रद्धालु निशान लेकर मंदिर पहुंचे और श्याम बाबा को निशान अर्पित किए। वहीं, अपनी मनोकामना लेकर आए भक्तों ने बाबा के सम्मुख अर्जी लगाई, तो कई भक्तों ने मनोकामना पूरी होने पर अर्जी खोली भी। मंदिर परिसर दिनभर "हारे के सहारे की जय" के जयकारों से गूंजता रहा।

मातृशक्ति ने किया भजन-कीर्तन
मंदिर में महिला श्रद्धालुओं की भी भारी भीड़ उमड़ी। मातृशक्ति ने मंदिर प्रांगण में समूह में झूमते हुए श्याम बाबा के भजन-कीर्तन गाकर आराधना की। भक्ति और उत्साह का यह सिलसिला सुबह से देर रात तक चलता रहा।

इंदौर के फूलों से हुआ मनमोहक श्रंगार
भीषण गर्मी को देखते हुए श्याम बाबा के लिए इंदौर से विशेष प्रकार के फूल मंगवाए गए जो अधिक समय तक ताजा रह सकें। पीले व सिंदूरी गेंदे, सफेद गुलधारी व मोगरे की मालाओं से श्याम बाबा, भगवान पशुपतिनाथ महादेव, श्री सालासर बालाजी व श्रीराम-कृष्ण दरबार का आकर्षक श्रंगार किया गया। बाबा को सुंदर बागा धारण कराया गया तथा कानों में रजत रंग के कुंडल, सिर पर मुकुट व छत्र से मनमोहक श्रंगार किया गया।
खाटूधाम से लाई गई अखण्ड ज्योत के दर्शन
बड़वानी के समीप ग्राम तलून में हिमाचल के संत शिरोमणि शशि गिरिजी महाराज के सानिध्य में श्याम बाबा का भव्य मंदिर बनकर लगभग तैयार हो चुका है। तलून में आगामी 27 जून से 1 जुलाई तक मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा का भव्य आयोजन किया जाएगा। इसी के निमित्त तलून के श्याम भक्तों द्वारा दो दिन पूर्व राजस्थान के प्रसिद्ध श्री खाटूधाम से ज्योत लाई गई। इस ज्योत को मंदिर के शुभारंभ तक अंजड के श्री श्याम मन्दिर में स्थापित किया गया है। यहां अखण्ड ज्योत की प्रतिदिन पूजा-अर्चना की जा रही है व सभी भक्तजन ज्योत के दर्शन लाभ ले रहे हैं।
दिनभर हुए विविध आयोजन
- प्रातःकालीन कार्यक्रम: अल सुबह 5 बजे पण्डित बसन्त शर्मा ने श्याम बाबा व मन्दिर में स्थापित सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन-अर्चन किया। सुबह 7:30 बजे मंगला आरती की गई।
- भोग व महाआरती: सुबह 11:30 व रात्रि 8:30 बजे भोग लगाकर भोग आरती की गई। शाम 7 बजे हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में संगीतमय महाआरती कर श्याम बाबा का भव्य दरबार सजाया गया तथा ज्योत प्रज्वलित की गई, जिसमें श्रद्धालुओं ने श्रद्धा भाव से आहुतियां प्रदान की।
- प्रसादी वितरण: संध्याकालीन आरती पश्चात श्याम एकादशी प्रसादी सेवा ग्रुप की ओर से फलाहारी मिक्चर, फल-फ्रूट व मिठाई की प्रसादी का वितरण किया गया।
- भजन संध्या: रात्रि 8 बजे से स्थानीय गायक कलाकारों की टीम द्वारा श्याम बाबा के भजनों की प्रस्तुतियां दी गईं जो देर रात्रि 11 बजे तक चलीं। इसके पश्चात 11:30 बजे शयन आरती की गई।
अधिकमास एकादशी का विशेष महत्व
पण्डित बसन्त शर्मा ने बताया कि अधिकमास यानी पुरुषोत्तम मास में आने वाली एकादशी का महत्व सामान्य दिनों की एकादशी से कई गुना अधिक होता है। हर तीन साल में एक बार आने वाले इस पवित्र माह में व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने से भक्तों को सभी पापों से मुक्ति मिलती है और बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।
- अक्षय पुण्य: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिकमास की एकादशी का व्रत करने से सामान्य एकादशियों की तुलना में एक लाख गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होता है।
- दुर्लभ संयोग: यह व्रत तीन साल में केवल एक बार आता है, इसलिए इसे 'पुरुषोत्तम कमला एकादशी' भी कहा जाता है।
- लक्ष्मी कृपा: इस दिन व्रत रखने से भगवान विष्णु के साथ-साथ मां लक्ष्मी की भी कृपा बरसती है, जिससे घर में धन-धान्य की अक्षय वृद्धि होती है।
- मोक्षदायिनी: यह व्रत न केवल व्रत रखने वाले को, बल्कि उसके पूर्वजों तक को मोक्ष और मुक्ति प्रदान करने में सहायक माना जाता है।
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